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बुधवार, 17 जुलाई 2019

उसे एक नजर देखते ही मेरा मन हर्षित हो जाता है। कभी कभी तो मन करता है कि उसके गालों को चूम लू लेकिन उसके गंदे कपड़े को देखकर मैं सहम जाता हूँ। शायद जिंदगी जीने का असली मजा वही ले रहा है।


दस साल का लड़का रौनक चौथी कक्षा में पढ़ता है। जैसा नाम वैसा ही काम, चेहरे पर मासूमियत और चंचलता साफ झलकता है। उसे एक नजर देखते ही मेरा मन हर्षित हो जाता है। कभी कभी तो मन करता है कि उसके गालों को चूम लू लेकिन उसके गंदे कपड़े को देखकर मैं सहम जाता हूँ। शायद जिंदगी जीने का असली मजा वही ले रहा है। इसीलिए तो विकट से विकट परिस्थितियों में भी वह हमेशा मुस्कुराते रहता है। बड़ी से बड़ी बात को भी वह मुस्कुराते हुए इस तरह बोलता है। की सुनने बालों के दिल तक वह बात पहुँच जाता है। जब वो क्लास में नही रहता है तब पढ़ाने में मेरा मन नही लगता है।

उसके परिवार के सभी सदस्यों को मैं अच्छी तरह से जानता हूँ। उसके पिताजी टमटम चलाते है। माँ खेतीबाड़ी के काम मे मजदूरी करती है। और एक बड़ी बहन है। जो उससे तीन साल बड़ी है। वह घर पर ही रहती है और चूल्हा चौका करती है। कभी कभी स्कूल भी आ जाया करती है। आज जब मैं विद्यालय पहुँचा तो थोड़ा गिला हो गया था। क्योंकि रास्ते मे रुक रुक कर हल्की बारिश हो रही थी। कक्षा में प्रवेश करते ही मैंने इधर उधर देखा रौनक आज भी नही आया था। मैंने बच्चों से पूछा तो पता चला कि आज उसकी बहन पढ़ने के लिए आई है। मैंने दूसरी कक्षा में जाकर उसकी बहन से पूछा तो पता चला कि परसों बारिस में उसका पूरा किताब गिला हो गया था जिसे उसने चूल्हे पर सूखने के लिए दिया और खेलने चला गया। तो उसका किताब ही जल गया। अब वो कहता है कि बिना किताब के वो स्कूल जाकर क्या करेगा।

आज भी मुझे याद जब मैं पहली बार शहर से ट्रान्सफर होकर इस गाँव के विद्यालय में पढ़ाने के लिए आया था। तो स्टेशन के बाहर रौनक और उसके पिताजी सवारी के इंतजार में अपने टमटम पर बैठे थे। रौनक चौथी कक्षा में प्रवेश करने के बाद किताब खरीदने के लिए पिताजी के साथ बाजार आया था। नई नई किताब को देखकर वो काफी खुश था। कभी इस किताब को पलटकर पढ़ने लगता, तो कभी उस किताब को पलटकर पढ़ने लगता। मैं भी उसके पास जाकर टमटम पर बैठ गया। और उसकी खुशी में सामिल होते हुए पूछा नई किताब है? उसने हाँ में जबाब दिया। और बोला आपको पढ़ना आता है? मेरे पापा को तो पढ़ना नही आता है। बातचीत के दौरान पता चला कि जिस विद्यालय में मेरा ट्रान्सफर हुआ है उसी में वो भी पड़ता है। पहली मुलाकात में ही वो मुझे अपना सा लगने लगा।

उसके पिता ने उसे डाँटते हुए कहा कि किताब खरीदने के लिए उसके पास पैसे नही थे तो दुकानदार को आधे पैसे देकर आये है और आधे धीरे धीरे चुकता कर देंगें। इसलिए मन लगाकर पढ़ना। बात करते करते कब मंजिल तक पहुँच गए पता ही नही चला। टमटम से मैं और रौनक नीचे उतर गया और उसके पिताजी को किराये के पैसे देने लगा। पर उन्होंने लेने से मना कर दिया। जब मैं पूरी तरह से संतुष्ट हो गया कि वो किसी भी कीमत पर पैसे नही लेने बाले है तो मैंने उसे बापस अपने पर्स में रख लिया। उसके पिताजी सवारी को लेकर आगे चले गए। मैं और रौनक विद्यालय की ओर चल दिया। उसने बताया कि रास्ते मे उसका घर पड़ता है तो पहले वो घर जाएगा उसके बाद विद्यालय जाएगा। मैं चलते चलते सोचते जा रहा था कि जिसके पास बच्चों के किताब खरीदने के पैसे नही है और वो फिर भी मुझसे किराया नही लिया। समय आने पर मैं इसे सूद समेत बापस करूँगा।

सायद अब वो दिन आ गया है। जब मैं उसके लिए किताब खरीदकर ला दूं। मैंने तय किया कि कल आते समय किताब खरीदकर लेते आऊँगा। कल जैसे ही मैं स्टेशन से बाहर निकलकर किताब की दुकान पर पहुँचा तो रौनक पहले से ही वहाँ पहुंचा हुआ था। और किताब खरीदकर वहाँ से निकल रहा था। मैंने उससे पूछा कि किताब खरीदने के पैसे कहाँ से लाया तो उसने कहा कि, मैंने दो दिन ट्रैन में पानी बोतल बेचकर पैसे कमायें है। उसकी यह बात सुनकर मैं भावुक होने लगा मेरे आँखों से आँसू निकलने लगा। जिसे मैंने छुपाते हुए उससे कहा कि उसने मुझे क्यों नही बताया। मैं तुम्हारे लिए सरकार से किताब की मांग करता। इस पर वह बोला हम गरीब लोगों तक सरकारी सुविधा पहुँचता कहाँ है सर वो सब तो रास्ते मे ही खत्म हो जाता हैं। और हँसने लगा...
यहाँ विडियो में देखिए मासूम बच्चों की प्रतिभा...

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