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गुरुवार, 18 जुलाई 2019

नागपंचमी के रोज साँप को दूध न पिलाये वरना लग सकता है सर्प दोष... बाढ़ परसावा में नागपंचमी का पर्व हर्षउल्लास के साथ मनाया जाता है।


नागपंचमी का त्योहार कैसे मनाया जाता है?

वैसे तो नागपंचमी का त्योहार भारत के कई हिस्सों में मनाया जाता है। लेकिन आज हम बात करेंगे कि बिहार में नागपंचमी का त्योहार किस तरह से मनाया जाता है। नागपंचमी के दिन सुबह जल्दी जागकर निम के पत्ते तोड़कर लाया जाता है। जिसे घर के दरवाजे और कमरों में लटकाया जाता है। साथ ही बचे हुए निम के पत्तो का घोल बनाकर सभी को पिलाया जाता है। जिसकी ऐसी मान्यता है कि सालभर तक कोई भी जख्म शरीर के किसी भी हिस्से में नही होता है। निम का घोल पीने में करवा लगता है तो जो लोग घोल नही पी पाते है उन्हें निम के दातुन से दाँत साफ करने को दिया जाता है। घर की औरतें गाय के गोबर का लेप बनाकर घर के बाहर चारों तरफ लेप लगाती है। जिसकी ऐसी मान्यता है कि घर पूरी तरह से बंध जाता है और नाग देवता घर के अन्दर प्रवेश नही करते है। लेकिन घर की सुंदरता खराब न हो इसे देखते हुये यह परम्परा धीरे धीरे बिलुप्त होती जा रही है। स्नान आदि करने के बाद भगवान को दूध और धान के लावा का भोग लगाया जाता है। साथ ही गाँव के मन्दिर में भी धान के लावा और दूध का भोग लगाया जाता है। आज के दिन खाने में खीर पूरी सबइ इत्यादि बनाया जाता है साथ ही फलों में आम और कटहल के कोवा खाने का रिवाज है। जिनके यहाँ कटहल का फल उपजता है वे अपने रिश्तेदारों के यहाँ दो दिन पहले ही उपहार के तौर पर भेज देते है। इस तरह से नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है।

नागपंचमी का त्योहार कहाँ मनाया जाता है?

वैसे तो हर गाँव में नागपंचमी पर्व मनाया जाता है लेकिन पटना जिला के बाढ़ परसावा गाँव में इस पर्व को बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन यहाँ मेला का भी आयोजन किया जाता है। जिसे देखने के लिए दूर दूर से गाँव के लोग आते है। इस गाँव मे ब्रहम बाबा का पिण्ड है। जिनकी ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त यहाँ घी चढ़ाते है उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। यहाँ के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से दर्शन करने आते है उन्हें नाग देवता दर्शन देते है।

नागपंचमी का त्योहार क्यों मनाया जाता है?

ऐसी मान्यता है कि समुन्द्र मंथन के समय समुन्द्र से जो बिष का घड़ा निकला था उसे कोई देवी देवता ग्रहण करने के लिए तैयार नही थे तब भगवान भोलेनाथ ने उस बिष को पी लिया था। पीते समय बिष की कुछ बूंदें नीचे गिरने लगा था। जिसे नाग देवता ने ग्रहण कर लिया था। तब से पूरा सर्प जाती विषैला हो गया। बिष के प्रकोप से बचाने के लिए सभी देवताओं ने नागदेव को दूध से स्नान कराया। उसके बाद से ही नागपंचमी का पर्व मनाया जाने लगा। इस दिन नाग को दूध से स्नान कराने का भी रिवाज है। लेकिन अब लोगों ने नाग को दूध पिलाना शुरू कर दिया है। विज्ञान के अनुसार साँप को दूध नही पचता है जिससे उसकी मौत हो जाती है। इसलिए नागपंचमी के दिन साँप को दूध न पिलाये बल्कि उसे दूध से स्नान करायें। दूध पिलाने से साँप की मृत्यु हो गई तो आपको सर्प दोष भी लग सकता है।

नागपंचमी पर्व कब मनाया जाता हैं?

हिन्दी महीने के अनुसार सावन महीना प्रवेश करने के पाँच दिन बाद यानी सावन महीना के पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार 2019 मे नागपंचमी का त्योहार 21 जुलाई दिन रविवार को मनाया जाएगा। आप सभी पाठकों को नागपंचमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

यहाँ विडियो में देखिये विसुआ मेला की छोटी सी झलक

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