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शनिवार, 22 जून 2019

अशोक धाम मंदिर लखीसराय जिसके बारे में ऐसी सच्चाई जो आप नही जानते है।

श्री इन्द्रमनेश्वर महादेव मंदिर
अशोक धाम मंदिर

अशोक धाम मंदिर लखीसराय जिसके बारे में ऐसी सच्चाई जो आप नही जानते है।


लखीसराय जिला में बना ये शिव मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। इस मंदिर की अपनी एक अलग कहानी है। मंदिर बनने से पहले यह इलाका पूरा खाली हुआ करता था। इस जगह पर आसपास के गाँव से लोग अपने पशुओं को घास चराने के लिए यहाँ आया करते थे। सन 1977 ई की बात है अशोक नामक चरवाहा अपने पशुओं को लेकर घास चराने के लिए यहाँ आया हुआ था। और हर रोज की तरह आज भी वह गुल्ली डंडा खेलने के लिए डंडा से जमीन में गढ्ढा करने लगा तभी उसे जमीन के अन्दर कोई पत्थर होने का शक हुआ। तब उसने पत्थर के किनारे किनारे गढ्ढा खोदना शुरू किया। जहाँ उसे भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग मिला। उसने चिल्ला चिल्ला कर गाँव बालों को बुलाया और गाँव बालों की मदद से शिवलिंग को जमीन के अन्दर से बाहर निकाला गया। तेजी से यह खबर दूर दराज के गाँव मे भी फैलने लगा। इस शिवलिंग को देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आने लगे। धीरे धीरे यह सुनसान इलाका मेले में तबदील होने लगा। अशोक चरवाहे द्वारा इस शिवलिंग का खोज किया गया था इसलिए इस जगह का नाम अशोक धाम रखा गया।


मंदिर का निर्माण कब हुआ?

सन 1977 ई से सन 1992 ई तक इस शिवलिंग के लिए कुटिया रूपी मन्दिर बनबाया गया था जिसे सन 1993 में जगनाथपुरी के शंकराचार्य द्वारा शिवलिंग के लिए भव्य मन्दिर का पुनःनिर्माण किया गया। साथ ही मंदिर के बगल में पार्वती माता का मंदिर का भी निर्माण किया गया। उसके बाद इस मंदिर को इंद्रदेवन्स्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाने लगा। मंदिर का प्रांगण बहुत बड़ा है जिसमे गाड़ियों को पार्क करने की भी व्यवस्था की गई है। मंदिर प्रांगण में प्रवेश करने के लिए दो तरफ से बड़े बड़े गेट बनाये गए है। मन्दिर प्रांगण के बाहर दुकाने खुल गई है जिसमें प्रसाद, खिलौने और खाने पीने की समान बेची जाती है।


कौन सा पूजा यहाँ की जाती है?


वैसे तो यहाँ हर रोज मुंडन संस्कार, गाड़ी पूजन, विवाह धार्मिक अनुष्ठान इत्यादि के लिए श्रद्धालु आते रहते है। लेकिन सावन महीने में यहाँ जल चढ़ाने बाले भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। इस महीने के लिए यहाँ विशेष रूप से तैयारी की जाती है। मंदिर को सजाया जाता है और भक्तों की भीड़ को संभालने के लिए प्रसासन की भी व्यवस्था की जाती है। शिवरात्रि में भी यहाँ जल चढ़ाने के लिए भक्तों की भीड़ इकट्ठा होती है।


यहाँ कैसे पहुंचे?


रेल मार्ग से अशोक धाम मंदिर पहुचने के लिए बड़ा और निकटतम रेलवे स्टेशन लखीसराय जंक्शन है। यदि आप लोकल ट्रेन से सफर कर रहे है तो मनकट्ठा स्टेशन यहाँ से सबसे नजदीक है। लेकिन इस स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन बहुत कम रुकती है। सड़क मार्ग से यहाँ तक पहुंचने के लिए मुख्य सड़क जो लखीसराय शहर को जाती है वहाँ से कुछ ही दूरी पर स्थित है। सड़क के किनारे ही आपको अशोक धाम मंदिर का बड़ा सा गेट मिल जाएगा। जो टॉल नाका से कुछ ही दूरी पर है। हवाई मार्ग से आने पर पटना हवाई अड्डा सबसे निकट है। पटना से अशोक धाम की दूरी लगभग 120 किलोमीटर है। इस तरह रेल, सड़क और हवाई मार्ग के द्वारा यहाँ पहुँचा जा सकता है।

यहाँ विडियो में देखिए अशोक धाम मंदिर का भव्य दृश्य

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